महिला समाज की प्रमुख समाज सेविका,मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन की वालदा का इंतिकाल,गमगीन माहौल में, नम आंखों से की गई सुपुर्द ए खाक।

महिला समाज की प्रमुख समाज सेविका,मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन की वालदा का इंतिकाल,गमगीन माहौल में, नम आंखों से की गई सुपुर्द ए खाक।


जलालाबाद,शामली। जिशान काजमी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड राज्य के जनपद हरिद्वार के मंगलौर विधायक काज़ी निजामुद्दीन की वाल्दा,पूर्व मंत्री काज़ी मोहिउद्दीन की अहिल्या/ पत्नी नफीसा खातून का जुमेरात की रात में इंतकाल हो गया। जैसे ही यह गमगीन खबर लोगो को मिली,चारो तरफ आग की तरह फैल गई। विधायक के निवास पर लोगो का हुजूम जमा हो गया।
जानकारी के अनुसार मंगलौर विधायक काज़ी निजामुद्दीन की वाल्दा कोरोना के कारण कई रोज से अस्पताल में भर्ती थी,इलाज के दौरान कुछ आराम मिला तो उन्हे जुमेरात को घर ले आए, जुमेरात की रात में ही नौ बजे के लगभग उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
यूं तो दुनिया में सभी आते है मरने के लिए,मरना तो उसका है जिसके लिए ज़माना रोए।। जी, हा, कुछ बाकमाल ऐसी शख्सियत होती है,जिन्हे ज़माना हमेशा याद करता है। उन ही बा कमाल,महिला समाज की नेक सीरत,बा अखलाक, खुश मिजाज़, दीनदार, तहज्जुदगुजार, और बड़े ही खामुशी के साथ गरीबों,बे सहारा परिवारों, यातिमो की दिल खोलकर खिदमत अंजाम देने वाली, मंगलौर की प्रमुख समाज सेविका मरहूम नफीसा खातून न जाने कितने परिवारों को रोता बिलखता छोड़कर इस दुनिया ए फानी से कूच कर गई। उनके बारे में कहा जाता है लोगो की छुप छुपाते इतनी खिदमत करती थी की दूसरो को मालूम भी नही होता था। यहां तक कि परिवार वालो को भी इसकी भनक नही होती थी ।एक वृद्ध महिला बुजुर्ग ने, रो, रो,कर उनके बारे में बताया की, एक बार एक महिला,परेशान हाल आई उसने अपने कमजोर आर्थिक स्तिथि,परेशानी बयान की,ये सुन कर मरहुमा ने ,सबसे पहले खाना खिलाया,उसकी मदद के लिए जरूरी राशन का इंतजाम किया,लेकिन नगद रकम भी उस वक्त देनी जरूरी थी,उन दिनों बैंको की छुट्टियां थी,परेशान हो गई,कैसे रकम का इंतजाम किया जाए। हालांकि रकम का इंतजाम करना उनके लिए कोई मुश्किल काम नही था,,लेकिन खामुशी से इस अमल को अंजाम देना चाहती थी,तभी उन्होंने हाथ में पहने हुए सोने के कड़े बाजार में फरोख्त कराकर उस रकम को बड़ी खामुशी के साथ उस परेशान हाल महिला सवाली को अदा कर दी। ओर अल्लाह का शुक्र अदा किया की उसने मुझे इस खिदमत के लिए कुबूल किया। ऐसी बकामाल खातून बहुत कम देखने में आती है ऐसे दौर में,जो दूसरो के लिए, प्रेरणा स्रोत होती है तो वही हमेशा बेमिसाल होती है।
महिला समाज की प्रमुख समाज सेविका,मरहूम नफीसा खातून के जनाजे में सामाजिक राजनेतिक धार्मिक हस्तियां शामिल रही।जुमा के दिन,लगभग सात बजे गमगीन माहौल में नम आंखों के साथ ,आखरी रूसुमात सुपुर्द ए ख़ाक कर दी गई।

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