16 लाख के लागत से 20 वर्ष पहले बड़हरिया में पानी टंकी बना शोभा का बस्तु

16 लाख के लागत से 20 वर्ष पहले बड़हरिया में पानी टंकी बना शोभा का बस्तु

20 वर्ष पहले बड़हरिया में बना जलमीनार से आज तक पानी नही हुआ लोगो को नसीब

रिपोर्ट

परमानन्द पाण्डेय

बड़हरिया सिवान

बड़हरिया प्रखंड की आबादी सिवान जिले के अन्य प्रखंडों से अधिक है । इस प्रखण्ड में 30 पंचायत में 30 मुखिया , 41 बीडीसी , 30 सरपंच तथा 405 वार्ड और पांच सदस्य है । एक प्रमुख और एक उप प्रमुख है । बड़हरिया राजनीतिक और आर्थिक और राजस्व की दृष्टि से बिहार प्रदेश में अपना मोकामा हसिक करता है।
बड़हरिया की जनता और जनप्रतिनिधियों के मांग पर बिहार प्रदेश में पूर्व राजद की सरकार में बड़हरिया प्रखण्ड कार्यालय खेल मैदान के पूरबी छोर पर 16  लाख रुपया लगभग की लागत से 2001 में जल मीनार बनाया गया । पूर्व राजद की सरकार में 2001 में यह निर्मित पानी टंकी से प्रखण्डवासियो में यह चेतना बन गयी कि जल मीनार बन जाने से बड़हरिया वासी सहित बड़हरिया मुख्यालय स्थित सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय , विद्यालय संस्थान प्रतिष्ठानों के साथ साथ दुकानदारो और राहगीरों शुद्ध जल पीने को मिल जायेगा । लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जलमीनार का निर्माण के 20 वर्ष बाद भी उक्त जलमीनार से शुद्ध जल पीने की बात तो दूर आज तक इस जलमीनार से एक बूंद पानी पीने के लिए नहीं टपक सका है। बिहार प्रदेश के राजद सरकार के पूर्व जल संसाधन मंत्री- श्री इंद्रदेव भगत सांसद शहाबुद्दीन अवध बिहारी चौधरी की देखरेख में 2001 में पानी टंकी का निर्माण कराया गया था । लेकिन आज तक बड़हरिया वासी को मत जलमीनार से एक बून्द पानी का कतरा आज तक नसीब नहीं हुआ।  यह सरकार की विफलता मानी जाय की बड़हरिया प्रखण्डवासियो की दुर्भाग्य माना जाय। कहना बहुत ही मुश्किल है । राजनीत और राजनेता की पहेली आम से लेकर खास तक लोगो को जानने और पहचानने में भूल होती रही है और भूल होती रहेगी । प्राप्त जानकारी के अनुसार 14 जनवरी 1996 में प्रदेश के राजद सरकार के पूर्व लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्रीमती रामा देवी और पूर्व ग्रामीण बिकास मंत्री अवध बिहारी चौधरी , सिवान जिले के पूर्व राजद सांसद डॉ मोहम्मद शहाबुद्दीन और पूर्व जल संसाधन राज्यमंत्री इंद्रदेव भगत आदि ने बड़हरिया की जनता और जनप्रतिनिधियों के मांग पर बिहार सरकार से जलमीनार पास करा कर बड़हरिया में इस जलमीनार का विधिवत शिलान्यास किया गया था। उपरोक्त सभी पूर्व मंत्रियों एवं सांसद द्वारा विगत 30 मई 2001 में इस जलमीनार का लोगो को अपार भीड़ बुला कर विधवत उद्घाटन किया गया था । लेकिन उस समय से लेकर आज तक प्रदेश की सरकार आयी और चली गयी लेकिन बड़हरिया का जलमीनार झा था वही है । यानी उस समय भी जलमीनार से पानी नही टपका और आज तक भी जलमीनार से पानी नही टपक रहा है । है न दिलचस्प बात । जनता के लिए राजनेता सब कुछ करने के वादा करते है । लेकिन राजनेता चुनाव जीतने के बाद वादा भूल कर अपने सुख सुविधा में मशगूल हो जाते है ।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2001 में ही जलमीनार के उद्घाटन के समय ही समूचे बड़हरिया गांव बाजार और समूचे बड़हरिया के पूरे क्षेत्र से लेकर मुर्गिया टोला गांव सभी जगह पर इस जलमीनार का पाइपका जाल बिछा कर नल भी लगा दिया था , लेकिन जलमीनार का उद्घाटन के बाद से आज तक जलमीनार से पानी नही निकल सका और नही बिहार सरकार ने इसकी खोज खबर लिया । हालांकि बड़हरिया प्रखण्डवासियो ने जलमीनार चालू कराने को लेकर 2001 से लेकर अब तक बिहार सरकार और जिलाधिकारी से मांग करते रहे है ।
बहरहाल बड़हरिया का यह जलमीनार कई लाखों की खर्च के बाद बन तो गया लेकिन चालू नही हो सका यह बड़हरिया का दुर्भाग्य ही कहा जेयेगा अथवा सरकार की विफलता । जलमीनार की कहानी अब कागजों में सिमट कर फाइलों में दब कर किसी कार्यालय के रेक में पड़ कर धूल फांक रहा होगा। हालांकि जलमीनार को चालू करने की सारी सुविधाएं जलमीनार के अंदर मोटर सहित अन्य उपकरण और पानी टंकी भी है । मोटर चालू स्थिति में भी है। लेकिन इस का जलमीनार लोगो को शुद्ध पानी एक बूंद भी देने में असमर्थ है । हालांकि बाहर से देखने से यही लगता है की मोटर और टंकी दोनो ठीक है । लेकिन पानी क्यो नही लोगो तक पहुचता है चिंतनीय है ।  इस तरह से बड़हरिया प्रखंड़ के लोगो को उक्त जलमीनार से शुद्ध जल आज तक नसीब नहीं हो सका है । ज्ञात हो कि सरकार द्वारा शुद्ध जल लोगो को मुहैया कराने के लिए 16 लाख रुपया लगभग की लागत से बड़हरिया का यह जलमीनार का निर्माण कराया गया था । लेकिन बाजार के लोगो को एक बूंद पानी नसीब नही हुआ। इतना ही नहीं, जब कभी भी जलमीनार से पानी की सप्लाई दी जाती है देखने को मिलता है, की पानी का नलका से पानी नहीं निकलकर जमीन के अंदर से पानी बुलबुला बन कर निकलने लगता है और पूरा सड़क पानी से पट जाता है। प्रखण्डवासियो की माने तो उक्त जलमीनार का पानी सप्लाई करने हेतु जो पाइप जमीन के अंदर बिछाने का कार्य हुआ है उसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई है। इसलिये बड़हरिया में 20 वर्ष पहले बना यह जलमीनार खुद प्यास है तो लोगो को पानी कहा से पिलाये । अंततः यह जलमीनार के जगह शोभा की बस्तु बन कर रह गयी है।

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