गांव लंढौरा गुर्जर के ग्रामीणों ने की मिसाल पेश, गरीब ट्रक चालक को बनाया प्रधान

गांव लंढौरा गुर्जर के ग्रामीणों ने की मिसाल पेश, गरीब ट्रक चालक को बनाया प्रधान

सहारनपुर। चुनावों में हर बार कई ऐसे उम्मीदवार होते हैं जिनकी कहानियां काफी रोचक होती हैं। इस बार यूपी के सहारनपुर जनपद कि ब्लॉक बलियाखेड़ा की ग्राम पंचायत लंढौरा गुर्जर से ऐसे ही एक प्रत्याशी बाबर गुर्जर को प्रधान चुना हैं। इनके पास ना नकदी, ना जेवर और ना ही बैंक में कोई रुपैया था। पैदल प्रचार करते थे। वर्ष 2010 से लगाातर ग्रामीणों की सेवा करते आ रहे हैं। ब्लॉक बलियाखेड़ा की ग्राम पंचायत लंढौरा गुर्जर से ग्राम पंचायत चुनाव में एक तरफ जहां लखपति उम्मीदवारों की लंबी सूची थी, वहीं उम्मीदवार बाबर गुर्जर ऐसे भी थे जिनके अकाउंट में एक भी पैसा नहीं है। यूपी के सहारनपुर जनपद कि ब्लॉक बलियाखेड़ा की ग्राम पंचायत लंढौरा गुर्जर से ऐसे ही एक प्रधान प्रत्याशी बाबर गुर्जर थे। बाबर गुर्जर और उनकी पत्नी दोनों के ही बैंक अकाउंट में एक भी रुपया नहीं है। बाबर गुर्जर के साथ एक और दिलचस्प बात यह है कि वह वर्ष 2010 से ग्राम पंचायत लंढौरा गुर्जर के ग्रामीणों की सेवा करते आ रहे हैं। माना जा रहा है कि शायद 2021 ग्राम पंचायत चुनाव में बाबर सबसे गरीब उम्मीदवार थे। 28 वर्षीय बाबर गुर्जर पेशे से ट्रक चालक हैं। बाबर गुर्जर वर्ष 2010 से ग्रामीणों के दुख दर्द को बांटते आ रहे हैं।

– पैदल करते रहे चुनाव प्रचार

ऐसे में जबकि चुनावों में बड़ी-बड़ी गाड़ियों में प्रधान उम्मीदवार मतदाताओं को रिझाने में लगे रहे। बाबर गुर्जर लोगों के बीच पैदल पहुंचते रहे। मीडिया से बातचीत में बाबर गुर्जर ने कहा, ‘मेरे पास बाइक है लेकिन हर रोज पेट्रोल के लिए पैसे नहीं हैं। मुझे परिवार का भी ख्याल रखना है। मैंने कोई और नौकरी की तलाश की थी लेकिन मेरे मुताबिक कोई और नौकरी नहीं मिली।’ बाबर गुर्जर ने आगे बताया, ‘पिछले 11 वर्षों से ग्रामीणों की सेवा करता आ रहा हूं। चुनाव में ग्रामीणों के कहने पर ही पर्चा भरा था। लोगों से मैंने खुद के लिए वोट की अपील की। मुझे कई बार आश्चर्य होता है कि बड़े नेता चुनाव प्रचार पर इतना खर्च क्यों करते हैं जबकि इन पैसों को लोगों के हित में लगाया जा सकता है।’

– दलित वर्ग का मिला समर्थन

बताया जाता है कि ब्लॉक बलियाखेड़ा की ग्राम पंचायत लंढौरा गुर्जर में सबसे ज्यादा वोट दलित वर्ग का हैं। दलित वर्ग के लोगों का कहना है कि बाबर गुर्जर एक गरीब परिवार से हैं जो पिछले 11 वर्षों से ग्रामीणों की सेवा करता आ रहा है। पेशे से ट्रक ड्राइवर है। गांव में अगर किसी को भी कोई दिक्कत होती है तो सबसे पहले बाबर गांव वालों के साथ खड़ा नजर आता है। बाबर की दरियादिली देखकर हमने इसको प्रधान चुना है।

– बुजुर्गों के साथ-साथ नन्हे-मुन्ने बच्चों का भी बाबर को मिला प्यार

मिली जानकारी के अनुसार बाबर गुर्जर को बुजुर्गों के साथ-साथ नन्हे-मुन्ने बच्चों का भी प्यार मिला है। गांव के अफसर अली बताते हैं कि बाबर को जिताने के लिए नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी कड़ी मेहनत की है। बाबर के चुनाव प्रचार में अंकिता, सुमित, अमन, अनवर, समीर, अनस आदि दर्जनों बच्चों ने घर घर जाकर बाबर के लिए वोट मांगे व चुनाव प्रचार किया।

– बाबर को जिताने के लिए अफसर अली ने किया सहयोग

लंढौरा गुर्जर गांव के लोग बताते हैं कि बाबर गुर्जर व अफसर अली की जोड़ी धर्मवीर की जोड़ी जैसी है। बाबर गुर्जर तो गरीबी के कारण ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाया, अपने परिवार के पालन पोषण के लिए वह ट्रक चलाने लगा। अफसर अली एक अच्छे परिवार से हैं जो पढ़ लिख कर दिल्ली पुलिस में भर्ती हो गया। अफसर अली ने दिल्ली में ड्यूटी के दौरान ही अपनी दोस्ती का भी फर्ज अदा किया है। अफसर अली ने बाबर गुर्जर के लिए ड्यूटी के दौरान ही ग्रामीणों से संपर्क कर उनके पक्ष में मतदान करने की अपील करते रहे। मिली जानकारी के अनुसार अफसर अली ने तन मन धन से बाबर गुर्जर का सहयोग किया है। आज यह परिणाम आया है कि बाबर गुर्जर ग्रामीणों ने बाबर के सर प्रधानी का मुकुट बाधा है।

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