मेरठ में इतने सारे श्मशानघाट होने के बाद भी क्‍यों सूरजकुंड में ही रहती है लाइन? हैरान कर देगी वजह

मेरठ में इतने सारे श्मशानघाट होने के बाद भी क्‍यों सूरजकुंड में ही रहती है लाइन? हैरान कर देगी वजह

मेरठ। शवों के अंतिम संस्कार के लिए मेरठ शहर में अनेक स्थानों पर श्मशानघाट हैं। यह हम नहीं.. नगर निगम के दस्तावेज बतातें हैं। नगर निगम के अनुसार मेरठ में लगभग 30 से भी अधिक श्मशानघाट है, जिसको अगर चालू करा दिया जाए तो अव्‍यवस्‍था नहीं फैलेगी। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर में शवों के अंतिम संस्कार के लिए केवल कतार सूरजकुंड श्मशानघाट पर लगी रहती है। सूरजकुंड पर शवदाह के लिए कतार के पीछे की वजह भी हैरान करने वाली है। जांच पड़ताल करने पर पता चलता है कि सूरजकुंड पर भीड़ की असल वजह प्रशासन की लापरवाही है। वो भी ऐसे समय में जब व्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त करने की जरुरत है।

कोविड और नान कोविड शवों का एक ही जगह होता है अंतिम संस्‍कार

कोरोना संक्रमण से हो रही मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। सूरजकुंड श्मशानघाट पर एक दिन में 50 से ज्यादा शव अंतिम संस्कार को पहुंच रहे हैं। जबकि व्यवस्था अधिकतम 28 शवों के अंतिम संस्कार की है। यह बात नगर निगम के आला अधिकारियों को अच्छी तरह से मालूम है। उन्हें यह भी मालूम है कि श्मशानघाट पर कोविड और नान कोविड शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था अलग-अलग होनी चाहिए। ताकि नान कोविड शव के अंतिम संस्कार में शामिल हो रहे लोग संक्रमण की चपेट में आने से बचाये जा सकें। क्योंकि कोविड संक्रमित शव रखे होने पर संक्रमण के खतरे से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है। पर अफसोस की बात है कि ये सबकुछ जानते हुए भी नगर निगम के आला अधिकारी व्यवस्था बनाने में असफल हैं। हालात ये हो गए है कि सूरजकुंड श्मशानघाट पर कोविड व नान कोविड शवों की चिता एक साथ जल रही हैं। नान कोविड शव के अंतिम संस्कार में शामिल होने आ रहे लोग कब संक्रमण की चपेट में आ जाएं। इसकी कोई गारंटी नहीं। जबकि नगर निगम अधिकारी चाहते तो कोविड और नान कोविड शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था अलग अलग बना सकते हैं। यह जरूरी भी है। क्योंकि संक्रमित शव के दाह संस्कार में देरी नहीं की जा सकती है। एम्बुलेंस में घन्टो शव नहीं रोके जा सकते हैं।

 

इन श्मशानघाट को चालू करने की जरूरत

नगर निगम क्षेत्र में सूरजकुंड श्मशानघाट के अलावा जटौली, फतेहउल्लापुर, खुरर्मपुर, दायमपुर, अच्छरौंदा, नगलताशी कासमपुर, बुढेरा जाहिदपुर, रैसना, अब्दुल्ला पुर, कसेरू बक्सर, मलियाना, फाजलपुर, घोसीपुर, औरंगशाहपुर डिग्गी, कुंडा, रोशनपुर डोरली, मोहकमपुर, दांतल, मोहम्मदपुर लाला, पठानपुरा, मुरलीपुर गुलाब, रामपुर पाऊटी, खड़ौली, नूर नगर, कंचनपुर घोपला, लिसाड़ी, काशी, रिठानी, शोभापुर, बराल परतापुर, नई बस्ती लल्लापुरा, पूठा आदि श्मशानघाट हैं। इन श्मशानघाट को चालू करने की जरूरत है। कम से कम नान कोविड शवों के दाह संस्कार तो इन श्मशानघाट पर कराने की व्यवस्था की जा सकती है।

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