लाखो रूपये का जुर्माना होने तथा पट्टे धारक पर मुकदमे होने तथा किसानो की शिकायतो के बाद भी कोई ठोस कानूनू कार्यवाही न होना एक बडा सवाल खडा करता है

__ लाखो रूपये का जुर्माना होने तथा पट्टे धारक पर मुकदमे होने तथा किसानो की शिकायतो के बाद भी कोई ठोस कानूनू कार्यवाही न होना एक बडा सवाल खडा करता है

कैराना __ लाखो रूपये का जुर्माना होने तथा पट्टे धारक पर मुकदमे होने तथा किसानो की शिकायतो के बाद भी कोई ठोस कानूनू कार्यवाही न होना एक बडा सवाल खडा करता है । आखिर सब नियम कानून को ताख पर रख कर किस के इशारे पर चलती है नगलाराई की रेत खनन । दंबगता या पैसे की गर्मी यह तो खनन कर्ता या अधिकारी कर सकते है खुलासा । पट्टे धारक सहित अन्य खनन करने वालो पर मुकदमे होने के बाद भी नही हो सकी कोई गिरफ्तारी आखिर क्या है प्रसासन की मजबूरी । जबकि खनन माफियाओ ने पुलिस तक पर अपना रोब गालिब करने मे भी नही छोडी थी कोई कमी तो वही मीडिया कर्मीयो के साथ भी की थी अभद्रता । उसके बावजूद भी खनन माफियाओ के होसले बुलद मनमानी के हिसाब से यमुना का सीना चीर करते है अवैध रेत खनन ।
कैराना के गाव नगलाराई मे रेत खनन के नाम पर पाच साल का पटटे की परमिशन नियम कानून के तहत मिली हुई है लेकिन परमिशन के मिलते ही खनन करने वाले क्या सब कानून नियम भूल जाते है जिसका जीता जागता उदाहरण नगलाराई खनन पांइट ब्या करता है । जिस पर कोई किसी प्रकार का कोई नियम कानून का पालन देखने को नही मिल सकता ओर उसके बावजूद भी खनन पाइट रात दिन बराबर चलता नजर आता है जबकि रात के अधेरे मे किसी को भी यमुना से रेत निकालने की कोई प्रमिशन नही मिलती लेकिन कोई न कोई ऐसी जादूई ताकत नगलाराई खनन माफियाओ को मिली है जो रात के अधेरे मे बडे पैमाने पर रेत का खेल चलता रहता है ओर स्थानिय अधिकारी गण कुछ नही कर पाते खनन अधिकारी नगलाराई खनन पर न जाने कितनी किसानो की शिकायतो पर जाच करने पहुचे लेकिन कुर्सीयो पर बैठकर खनन माफियाओ के मुताबिक ही जाच करने मे माहिर नजर आये जबकि किसानो सहित अन्य ग्रामीणो ने न जाने कितने बार खनन का विरोध किया लेकिन उसके बावजूद भी कोई ठोस कार्यवाही नही होती नजर आयी पट्टे धारक व अन्य लोगो पर पुलिस द्वारा मुकदमे तो लिख दिये गये लेकिन गिरफ्तारी आज तक सम्भव नही हो सकी जबकि पुलिस के लिऐ किसी आरोपी की गिरफ्तारी कोई बडी बात नही अगर पुलिस चाहे तो आरोपी को जमीन के नीचे से भी निकाल सकती है । लेकिन न जाने क्यो नगलाराई खनन माफियाओ की गिरफ्तारी क्यो नही हुई ये भी बडा सवाल है । तो यही दूसरा सवाल यह भी उठता नजर आता है कि अधिकारियो द्वारा खनन माफियाओ पर लगभग 71 लाख का जुर्माना किया था जिसकी वसूली का कोई खुलासा नही हो पाया क्या खनन माफियाओ से जुर्माना वसूला जायेगा यह भी कहना अभी सम्भव नही है जिसकी जानकारी के लिऐ ऐक समाजसेवी ने जन सूचना अधिकार के तहत जानकारी मागी है जिसका जवाब मिलते ही उसका सही खुलासा हो सकेगा । क्या खनन माफिया बैखोफ होकर रेतखनन करते रहेगे या फिर कानून के शिकंजे मे होगे यह सब तो समय के गर्व मे छिपा है । लेकिन आखिर कानून के दायरे मे क्यो खनन नही करते या फिर कानून तोडने मे किसी की मदद मिलती है यह भी बडा सवाल है । नगलाराई खनन पांइट पर जाने वाले रास्ते को लेकर भी किसानो ने कई बार ऐतराज जाहिर कर रोड जाम किया लेकिन खनन कर्ताओ की दंबगता के चलते किसानो को पीछे हटना पडा । रात के अधेरे मे होने वाला रेत का खेल बडे पैमाने पर होता है यह रेत का खेल केवल हवा मे नही होता बल्कि रात के समय रेत से भरे वहान सडको पर ही दोडते दिखाई देते है जिन्हे टोकने पूछने की जरूरत कोई करता नजर नही आता जो वे लगाम सडको पर दोडते नजर आते है यह खननपाइट हमेशा चर्चाओ मे रहा है नगलाराई खनन पाईट पर यमुना नदी मे बडी बडी मशीनो ये गहरे गहरे गडडे खोदकर व चलते पानी से रेत को निकालना तथा रात के समय रेत खनन करना यह सब एन जी टी व प्रयावरण के नियमो के खिलाफ बताया जाता है लेकिन जो लोग एन जी टी के नियमो का पाठ पढाने के माहिर नजर आते है क्या वह यह नही जानते कि यमुना नदी मे कितने बडे पैमाने पर सब नियम कानून ताख पर रख कर रेत का खेल रात दिन बराबर चलता नजर आता है । क्या खनन माफियाओ के हाथ कानून के हाथो से लम्बे है जो कि कानून की प्रवाह न कर मनमानी के चलते सब अवैध रेत का खेल बडे पैमाने पर खेला जा रहा है ओर अधिकारीगण सब खामोश नजर आते है जबकि इस खेल से राहगिरो के आने जाने वाले रोड भी टूट चुके है ओर आने वाला वर्षा श्रष्तू का समय भी यमुना के निकट रहने वाले ग्रामीणो के लिऐ बडा खतरा साबित हो सकता है क्योकि रेत खनन होने से यमुना बाध पुरी तरह नष्ट होने की कागार पर है जिस ओर किसी का ध्यान नही । ध्यान भी कैसे जाये जब मलाई मिलती है । तो वही खनन से यमुना मे होने वाले गहरे गडढे न जाने कितने लोगो की जान के दुश्मन बन सकते है यह कोई जानने को तैयार नही है जिसके होने से पूर्व मे न जाने कितने लोग इन्ही गहरे गडढोमे फसकर अपने गले मोत लगा चुके है तो वही कितने किसानो की फसले बर्बाद हो चुकी है जिसका किसी पर कोई ध्यान नही मलाई के सामने कोई कुछ बोलने तथा करने को तैयार नजर नही आता जिसके चलते यमुना नदी मे खनन माफिया अपनी दंबगता के चलते रात के अधेरे सहित दिन के उजाले मे खनन करते बैखोफ नजर आते है । क्या खनन माफियाओ पर काननू का शिकजा चलेगा यह तो कहना मुमकिन ही नही नामुमकिन दिखाई देता है । वही जन सूचना के अधिकार द्वारा मागी गयी जानकारी का जवाब आने पर ही कुछ बडे खुलासे होने की उम्मीद जतायी जा रही है ।

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