रमजान में रोजे रखती छोटी रोजेदार शादिया नौशाद

रमजान में रोजे रखती छोटी रोजेदार शादिया नौशाद

रिपोर्ट

परमानन्द पाण्डेय

बड़हरिया सिवान

बड़हरिया प्रखंड के डुमरी गांव के रहने वाले नौशाद आलम की पुत्री शादिया नौशाद की उम्र महज छह साल का है । पर वह रमजान के शुरुवाती रोजे से ही प्रतिदिन रोजा रखती है और नमाज पढती है और कुरान का तिलावत करती है । वह अपनी अम्मी के साथ रहती है | प्रतिदिन ससमय सुबह में अम्मी के साथ उठकर शेहरी भी खाती है तथा पूरे दिन बहुत ही उत्साह के साथ रोजा रहती है| घर वालों का कहना है कि उनलोगों के मना करने के बावजूद रोजा रखने के लिए जिद पर अड़ी हुई थी । अंततः हमसभी को उसके जिद के आगे झुकना पड़ा और शादियां रोजा रखने लगी । वैसे शादिया का घर गोपालगंज जिले के काजी टोला है । पर वह अपनी नानी के घर बड़हरिया के डुमरी गांव में ही बचपन से रहती एवं पढ़ती है| उसके मामू सुफियान सिद्दकी बताते है कि पढ़ने में भी उम्र के हिसाब से काफी तेज है तथा पढ़ाई में मन लगाती है| इतनी कम उम्र में रोजा रखने की अहमियत को शादियां नौशाद अपने शब्दों में बखूबी बताती है कि रोजा रखना शबाब का काम है एवं माहे रमजान में मैं सबको अमन चैन के लिए दुआ करती हूँ | शादियां ने कहा कि अल्लाह से नमाज अदा करने के बाद कोरोना महामारी को समाप्त करने की दुआ मांगती हूं।

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