फातिमा शेख और सावित्रीबाई फूले की कर्जबंद है भारत की करोड़ों महिलाएं : इस्मा

* : फातिमा शेख और सावित्रीबाई फूले की कर्जबंद है भारत की करोड़ों महिलाएं* इस्मा
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■ पत्रकार इन्तखाब आजाद

★ आपको बता दें कि जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता माननीय इस्मा जहीर देशभर में समाज के दबे कुचले शोषित अधिकार वंचित वर्ग की महिलाओं के जीवन में उजाला लाने की खातिर देशभर में काम कर रही हैं
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■ लखनऊ【उत्तर प्रदेश】 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता माननीय इस्मा जहीर ने महिलाओं को मुबारकबाद दी और कहा कि फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले भारत की उन करोड़ों महिलाओं की आदर्श है जो राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सहित विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की के मुकाम पर कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता माननीय इस्मा जहीर ने कहा कि फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले से पहले भारत में महिलाओं की स्थिति बड़ी दयनीय थी और वह पढ़ भी नहीं सकती थी । भारत में महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध था लेकिन फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले ने भारत में महिलाओं की शिक्षा के द्वार खोलकर भारत मे प्रथम महिला शिक्षिका होने का गौरव हासिल किया है यह हम महिलाओं के लिए बड़े गर्व की बात है और भारत की करोड़ों महिलाएं फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले की कर्ज बंद हैं।
■ सामाजिक कार्यकर्ता माननीय इस्मा जहीर ने कहा कि जब भारत में सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा राव फुले समाज के दबे, कुचले, शोषित, अधिकार वंचित, मजलूम तबके के जीवन में उजाला लाने की खातिर काम कर रहे थे, तब वर्ग विशेष के लोगों ने उनके मार्ग में अवरोध पैदा कर उन पर गोबर, कीचड़, पत्थर तक फेंके और तब सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा राव फुले खुद को असहाय महसूस करने लगे, तब फातिमा शेख सामने आई और अपने भाई उस्मान शेख की मदद से इन दोनों सामाजिक हस्तियों का ना खुलकर समर्थन किया बल्कि 1848 में महाराष्ट्र स्थित अपने घर में महिलाओं की शिक्षा का पहला स्कूल खोला और सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा राव फुले के साथ मिलकर भारत की प्रथम महिला शिक्षिका फातिमा शेख ने महिलाओं को शिक्षित करके आज इस मुकाम तक पहुंचाया, कि वह राजनीति हो या सामाजिक अथवा कोई सा भी क्षेत्र हो,वहां आज महिलाएं जो कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उसमें फातिमा शेख का सबसे बड़ी भुमिका है इसलिए वह हमारी आदर्श और भारत की प्रथम महिला शिक्षिका है एक बार पुन: भारत की तमाम महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बहुत-बहुत बधाई और महिलाए फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले के पद चिन्हों पर चलकर महिलाओं के सम्मान की खातिर संघर्ष करें ताकि उनके सपनों को पूरा किया जा सके।

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