कैराना: मेडिकल स्टोर और सड़क पर बिकता है नशा – नशे पर चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं

कैराना: मेडिकल स्टोर और सड़क पर बिकता है नशा

– नशे पर चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं

– पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कई जगह सक्रिय हैं नशा तस्कर

 

कैराना। (गुलवेज़ आलम)। बच्चों की ओर से नशे के रूप में ली जाने वाली तमाम चीजें कैराना के बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। चाहे वह रासायनिक नशीले पदार्थ हो, चरस या स्मैक। पेरेंट्स की नजरों से दूर छोटी उम्र में ही मासमू कई तरह के नशे को अपना रहे हैं। मासूमियत में ऐसी चीजों का शिकार होने के पीछे कहीं न कहीं जनपद में बैठे तमाम विभागों भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

मेडिकल पर नशीली ड्रग

कैराना में कई मेडिकल स्टोर पर बड़ी आसानी से नशीली दवाएं मिल जाती हैं। इनमें गोलियों के साथ ही नशीले इंजेक्शन शामिल हैं। इन्हें लेने के लिए चिकित्सक का अपने परामर्श पैड पर लिखना अनिवार्य होता है। लेकिन कमाई के चक्कर में मेडिकल स्टोर पर कम उम्र के बच्चों को भी नशीली दवाएं बेच दी जाती है।

इसका खुलासा कई बार नशा तस्कर पकड़े जाने पर होता रहा है। उनसे ही यह खुलासा भी हुआ है कि केवल फ्0 रुपए में चरस की पुडि़या और भ्0 से क्00 रुपए में स्मैक की एक डोज तस्कर उपलब्ध करा देते हैं। जबकि क्0 रुपए में मेडिसीन और फ्0 से भ्0 रुपए में इंजेक्शन का नशा मिल जाता है।

दुकानों पर भी लगे रोक

व्हाइटनर की बिक्री पर रोक के बावजूद इसे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। गली छोटी की दुकान से लेकर बाजार में कहीं से भी इसे खरीदा जा सकता है। वहीं कई दुकानों पर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे नियमित फेवीबॉड खरीदते हैं। लेकिन दुकानदार उन्हें टोकते तक नहीं।

ड्रग कर देते हैं सुन्न

चिकित्सकों का मानना है कि व्हाइटनर, फेवीबॉड, नशीले इंजेक्शन, गोली, स्मैक या कोरेक्स में ऐसे कैमिकल मौजूद होते हैं जो लेते ही दिमाग को सुन्न कर देता है। जिससे सोचने-समझने की शक्ति कम पड़ती जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि फ्लूड डायलूटर में टोलोडिन नाम का कैमिकल होता है जो सीधे दिमाग पर असर करता है।
यहां सक्रिय होते हैं नशा तस्कर
स्कूल कॉलेजों के पास, वीडियो गेम की दुकानें, फास्ट फूड सेंटर, बस स्टैंड, खेल मैदान युवाओं को नशा वितरित करने के मुख्य अड्डे बन चुके हैं। वहीं मेडिकल स्टोर संचालक और दुकानदार भी बच्चों को नशीले पदार्थ बेचने से गुरेज नहीं करते।

यहां भी बिकता हैं नशा

मेडिकल स्टोर – कोरेक्स, फेन्सिडिल, नशे के इंजेक्शन व नशीली गोली।
जनरल स्टोर व स्टेशनरी शॉप – व्हाइटनर, फेवीबॉड, शू-पालीस।
वाइन शॉप – बीयर, व्हिस्की, रम, वाइन।
तम्बाकू शॉप – सिगरेट, बीड़ी, सिगार, गुटखा, जर्दा
इसके अलावा नशा तस्कर भी इनमें से कई नशे बेचते हैं।

नशे के कारण

उत्सुकता, जिज्ञासा, अकेलापन, तनाव, प्रेम, नौकरी व परीक्षा में असफलता, पारिवारिक तनाव, नशीले पदार्थो का आसानी से उपलब्ध होना, कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए नशा, सामाजिक कुरीतियां जैसे विवाह आदि उत्सव में शराब, सिगेरट, अफीम व चरस का सेवन।
बच्चे में पहचान का तरीका
खेलकूद, पढ़ाई या किसी काम में मन नहीं लगना। खाने में अरूचि, शरीर कांपना, आंखे लाल होना, जुबान लड़खड़ाना, रात को ज्यादा जागना, चिड़चिड़ापन, घर से चीजें गायब होना, स्मरण शक्ति में कमी होना।

पेरेंट्स ऐसे करें उपाय

माता-पिता बच्चों से खुलकर बात करें और धैर्य से उनकी बात सुनें। डॉक्टर की सलाह पर घर में आने वाली दवाओं का ध्यान रखें। बच्चा कौन-कौन-सी दवाएं लेता हैं ध्यान रखें। नशीली दवाओं के बारे में अधिक जानकारी रखें। नशीली दवाओं और उनके खतरों के बारे में बताएं। नशे की लत के शिकार बच्चों को अच्छे परामर्श एवं उपचार केन्द्र पर लेकर जाए।

मेडिकल स्टोरों पर अगर बिना चिकित्सक परामर्श के नशीली दवाएं बेची जाती है इसकी तुरंत शिकायत करें।

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